आखिर क्यों ‘गद्दार’ और ‘बिकाऊ’ ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ बोलने से बच रही कांग्रेस

आखिर क्यों ‘गद्दार’ और ‘बिकाऊ’ ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ बोलने से बच रही कांग्रेस


इंदौर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में गत मार्च में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) गिरने के बाद से राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल हो रही है. इधर, मार्च में ही कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने बीजेपी (BJP) का हाथ थामकर कांग्रेस के लिए स्थिति और भी दयनीय कर दी थी. अब 3 नवंबर को राज्य में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (ByPoll) होने हैं. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही उपचुनावों के प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं. गौर करने वाली बात है कि अभियान में कांग्रेस ‘गद्दार’ और ‘बिकाऊ’ ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ बोलने से बचती दिख रही है.

सिंधिया परिवार ने किया विश्वासघात
उपचुनावों में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की 16 सीटों पर उपचुनाव होना है. जो कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ है. लेकिन यहां सिंधिया के खिलाफ कांग्रेस कोई खतरा मोल लेने की स्थिति में नजर नहीं आ रही है. जबकि इसी गढ़ में इतिहासकारों ने सिंधियाओं पर रानी लक्ष्मीबाई को धोखा देने और 1857 के विद्रोह को रोकने के लिए अंग्रेजों से हाथ मिलाने का आरोप मढ़ चुके हैं. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का यह भी दावा है कि चूंकि सिंधियाओँ की जनसंघ, भाजपा और कांग्रेस में आजादी के बाद अहम भूमिका रही है, इसलिए राजनीतिक दल इस उपचुनाव में सिंधियाओं की ‘गद्दारी’ के बारे में खुलकर बात करने से परहेज कर रहे हैं.

‘पारंपरिक गद्दार हैं सिंधिया’एक राजनीतिक पर्यवेक्षक के मुताबिक, कांग्रेस ने ही सिंधियाओं को गद्दारी का टैग दिया है. सिंधियाओं की पारंपरिक गद्दारी पर एक प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा कि सिंधिया ब्रिटिश सरकार के अधीन काम करते थे और उनकी गद्दारी की वजह से ही रानीलक्ष्मीबाई अंग्रेजों के हाथों शहीद हो गईं. बता दें कि राज्य में सिंधिया राजघराने ने कांग्रेस में रहते हुए कभी भी रानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस (18 जून) नहीं मनाया. लेकिन इस साल कमलनाथ ने रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की थी. वहीं, राज्य में बीजेपी का रानीलक्ष्मीबाई का स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में कोई योगदान नजर नहीं आता है.

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सिंधियाओं का गढ़
वरिष्ठ बीजेपी नेता जयभान सिंह पवैया जिन्हें सिंधियाओं का कट्टर आलोचक माना जाता है ने रानी लक्ष्मीबाई के समाधि स्थल पर कहा ‘मेरे लिए यह समाधि स्थल के मंदिर की तरह है, मैं पिछले दो दशकों से वीरंगाना बलिदान मेला का आयोजन देख रहा हूं, लेकिन इस साल कोरोना वायरस की वजह से यह मेला नहीं लग पाया.’ लेकिन पवैया ने सिंधिया पर हमला बोलते हुए कहा था कि सिद्धांतों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है और किसी की सुविधा के लिए इतिहास को नहीं बदला जा सकता है. हालांकि पार्टी हाई कमान के आदेश के बाद उन्हें अपना यह बयान वापस लेना पड़ा.

बीजेपी नेता ने बांधे सिंधिया की तारीफ के पुल
वहीं, सिंधियाओं के आलोचकों में से एक बीजेपी नेता और मध्य प्रदेश से पूर्व राज्यसभा सांसद प्रभात झा के विचार भी उऩके प्रति बदल गए हैं. सिंधियाओं से राज्यसभा सीट हारने के बावजूद झा ने बार-बार सिंधियाओं की प्रशंसा के पुल बांधे हैं. झा ने कहा कि सिंधिया ने नागरिकता कानून, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 पर भाजपा का समर्थन करके देश के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की. लेकिन, झा ने कांग्रेस के सिंधिया को भू-माफिया कहने पर चुप्पी साधे रखी.

कांग्रेस ने किया सिंधिया को दरकिनार
इधर, हाल ही में सिंधिया ने कमलनाथ सरकार को ‘गद्दार की सरकार’ कहकर संबोधित किया था और कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार किसानों, महिलाओं और नौजवानों के प्रति विश्वासघाती रही और जब कुछ नहीं हुआ तो पीछे हट गए. बता दें कि सिंधिया के समर्थकों ने पूर्व चुनाव अभियानों में प्रचार में यह कहा था कि साल 2018 के चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस सिंधिया को दरकिनार कर देगी. बता दें कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की जनता को कांग्रेस सरकार ने लगातार अनदेखा किया है जो कि सिंधिया का गढ़ है.

पार्टी नेता के बयान से हुई कांग्रेस की किरकिरी
वहीं, एक पुराने वीडियो में कांग्रेस नेता फूल सिंह बैरय्या ने पार्टी के लिए यह कहकर मुसीबत खड़ी कर दी थी कि रानीलक्ष्मी बाई कोई वीरंगाना नहीं हैं. कथित वीडियो में कांग्रेस नेता यह कहते हुए दिख रहे थे कि रानीलक्ष्मीबाई झांसी में लड़ी और ग्वालियर में आत्महत्या कर ली. बैरय्या के इस बयान के बाद कांग्रेस की खूब किरकरी हुई. बीजेपी ने इस बयान पर कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा है. वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने इसे बीजेपी की कोई चाल बताया है और कहा कि वीडियो को एडिट कर राज्य में कांग्रेस को घेरने की तैयारी की जा रही है.





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